खटीमा में रामलीला मंचन : हनुमान जी को बल याद आने से लेकर लंका दहन तक के प्रसंगों ने दर्शकों को किया भाव-विभोर
सनातन श्री रामलीला पत्र परिषद द्वारा आयोजित श्री रामलीला मंचन में शनिवार रात हनुमान जी को अपना बल याद दिलाने से लेकर लंका दहन तक के प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। लीला की शुरुआत जामवंत जी द्वारा हनुमान जी को उनका बल याद दिलाने से हुई। कथा के अनुसार हनुमान जी बचपन में चंचल स्वभाव के थे और अपनी बाल लीलाओं से ऋषि-मुनियों को परेशान करते थे, जिससे ऋषियों ने उन्हें शक्तियां भूल जाने का श्राप दिया था। वरदान था कि जब कोई उनकी शक्ति याद दिलाएगा तो वे पुनः बलशाली रूप प्राप्त करेंगे। जामवंत जी ने “कुछ याद करो अपना पवनसुत वह बालपन” कहते हुए उनकी शक्तियों का स्मरण कराया, जिसके बाद हनुमान जी लंका के लिए प्रस्थान कर गए।
इसके बाद लंका प्रस्थान, हनुमान-लंकिनी वार्ता, हनुमान-विभीषण मैत्री, अशोक वाटिका, अक्षय वध, हनुमान-मेघनाद युद्ध, हनुमान-रावण वार्ता और लंका दहन के दृश्यों का मंचन हुआ। प्रसंग में हनुमान जी ने मच्छर के रूप में लंका में प्रवेश किया। लंका की प्रहरी लंकिनी पर प्रहार से वह मूर्छित हो गई और उसे ब्रह्मा जी का वह प्रसंग याद आया कि किसी वानर के प्रहार के बाद राक्षस जाति का अंत निकट है। इसके बाद लंकिनी को प्रहरी सेवा से मुक्ति मिली। पूंछ में आग लगाने के बाद हनुमान जी ने लंका दहन किया।
आज की लीला में चाचा ने रावण और भतीजे अनुराग ने हनुमान की भूमिका निभाई। संस्था के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने राइस मिलर्स एसोसिएशन और डॉक्टर एसोसिएशन को सम्मानित किया। कार्यक्रम में महामंत्री इंद्रेश कुमार, मीडिया प्रभारी मनोज वाधवा, डॉ. आरिफ, अंजनी विक्रम सिंह, ईश्वर चंद्र अग्रवाल, शोभित अग्रवाल, राकेश गुंबर, अजय अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने बताया कि 20 अक्टूबर मंगलवार को शाम 5 बजे राणा प्रताप इंटर कॉलेज मैदान में रावण दहन किया जाएगा।