खटीमा में उत्साहपूर्वक मनाया गया 79वां शैलतांग विजय दिवस, युद्ध स्मारक पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
खटीमा थ्री बटालियन पैराशूट रेजिमेंट स्पेशल फोर्स के पूर्व सैनिकों की ओर से शनिवार को खटीमा के एक निजी होटल में 79वां शैलतांग विजय दिवस बड़े उत्साह और सैन्य परंपरा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सैनिक शैलतांग कमेटी के अध्यक्ष सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन हिम्मत नाथ सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में दर्जा राज्य मंत्री एवं पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष कैप्टन गंभीर सिंह धामी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुआ। पूर्व सैनिकों ने शैलतांग युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को नमन किया और उनके अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान को याद किया। इस दौरान शहीद सैनिकों के परिजनों और पूर्व सैनिकों के परिवारजनों ने भी प्रतिभाग कर वीरों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने शैलतांग युद्ध के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 7 नवंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आक्रमणकारियों का सामना करते हुए भारतीय सेना के जवानों ने अदम्य वीरता का परिचय दिया था। विषम परिस्थितियों के बावजूद दुश्मन के मंसूबों को नाकाम करते हुए भारतीय सेना ने शैलतांग की धरती पर ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। यही विजय भारतीय सेना के इतिहास में शौर्य और पराक्रम के प्रतीक के रूप में दर्ज है।

मुख्य अतिथि कैप्टन गंभीर सिंह धामी ने अपने संबोधन में शहीदों को नमन करते हुए कहा कि शैलतांग विजय दिवस हमें हमारे वीर जवानों के त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिकों का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। उन्होंने सभी पूर्व सैनिकों को विजय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूर्व सैनिक समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
कमेटी के अध्यक्ष सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन हिम्मत नाथ सिंह ने कहा कि शैलतांग विजय दिवस पूर्व सैनिकों के लिए गर्व का दिन है। यह दिन हमें एकता, अनुशासन और देशभक्ति का संदेश देता है। कैप्टन होशियार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए वीर जवानों के त्याग को याद किया और कहा कि नई पीढ़ी को सैनिकों के शौर्य की गाथाओं से अवगत कराना जरूरी है।
कार्यक्रम में खटीमा, चंपावत, बनबसा, टनकपुर और नानकमत्ता सहित आसपास के क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। सभी ने एक-दूसरे को विजय दिवस की बधाई दी और पुरानी यादों को ताजा किया। अंत में शहीदों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया और देश की एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प लिया गया।