सोशल मीडिया का बच्चों पर बढ़ता दुष्प्रभाव, अभिभावकों में चिंता
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। पढ़ाई, मनोरंजन और दोस्तों से जुड़ने के नाम पर बच्चे घंटों मोबाइल स्क्रीन पर बिता रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। हाल ही में सामने आया हानिया प्रकरण इस खतरे की गंभीरता को उजागर करता है। बताया जा रहा है कि हानिया नाम की एक किशोरी सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय रहने लगी थी। शुरुआत में रील्स देखना और फोटो साझा करना सामान्य लगता था, लेकिन धीरे-धीरे वह सोशल मीडिया की लत का शिकार हो गई। पढ़ाई से ध्यान हटना, अकेलेपन में रहना, चिड़चिड़ापन और परिवार से दूरी बनाना जैसे लक्षण उसमें दिखने लगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में सोशल मीडिया की लत के कई दुष्प्रभाव हैं। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी कमजोर होना, नींद पूरी न होना, मोटापा और थकान आम समस्याएं हैं। वहीं मानसिक स्तर पर बच्चे खुद की तुलना दूसरों से करने लगते हैं, जिससे हीन भावना, डिप्रेशन और आत्मविश्वास में कमी आती है।
मनोचिकित्सकों के अनुसार इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर लाइक और फॉलोअर्स की दौड़ बच्चों में तनाव पैदा कर रही है। वे हर समय खुद को परफेक्ट दिखाने की कोशिश में रहते हैं। साइबर बुलिंग, गलत कंटेंट, अनजान लोगों से संपर्क और ऑनलाइन ठगी जैसे खतरे भी बच्चों के लिए बड़ा जोखिम हैं। हानिया के मामले में भी सोशल मीडिया के जरिए गलत संगत और मानसिक दबाव की बात सामने आई, जिसने परिवार को झकझोर कर रख दिया।
शिक्षाविदों का कहना है कि 10 से 17 साल की उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इस उम्र में बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं और सही-गलत का फर्क समझने में चूक जाते हैं। कई बार बच्चे पढ़ाई से जुड़े वीडियो के बहाने सोशल मीडिया पर चले जाते हैं और घंटों उसी में उलझे रहते हैं, जिससे उनका शैक्षिक स्तर गिरता है।
इस समस्या से निपटने के लिए अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नजर रखें, स्क्रीन टाइम तय करें और उनके साथ खुलकर बातचीत करें। बच्चों को आउटडोर गेम, किताबें पढ़ने और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना जरूरी है। स्कूलों में भी सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
केंद्र और राज्य सरकार ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग को लेकर गाइडलाइन जारी की हैं, लेकिन जब तक परिवार स्तर पर जागरूकता नहीं आएगी, तब तक इस लत को रोकना मुश्किल है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए और बड़े बच्चों को भी अभिभावकों की निगरानी में ही इसका उपयोग करने देना चाहिए। हानिया जैसी घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं कि समय रहते बच्चों को सोशल मीडिया के मायाजाल से बचाना होगा, नहीं तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।