रामनवमी एवं विजयादशमी पर सजी काव्य की महफिल, कवियों ने बांधा समां, कवियों ने गीत, गजल और छंदों के माध्यम से रामभक्ति, प्रेम और सामाजिक सरोकारों को किया अभिव्यक्त
खटीमा। उत्तराखंड बाल कल्याण साहित्य संस्था खटीमा के सौजन्य से रामनवमी एवं विजयादशमी के पावन अवसर पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सभागार में भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। भानु प्रताप कुशवाहा एवं राम रतन यादव के संयोजन में आयोजित गोष्ठी में कवियों ने गीत, गजल, मुक्तक और छंदों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. महेंद्र प्रताप पांडेय ‘नंद’ ने की। खंड शिक्षा अधिकारी भानु प्रताप कुशवाहा मुख्य अतिथि तथा कैलाश पांडेय और डॉ. जगदीश पंत ‘कुमुद’ विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ राम रतन यादव ने मां सरस्वती की वंदना ‘विनती है मां शारदे, जगमग हो संसार, अंधियारा जग का मिटे, सब मिल बांटें प्यार’ से किया।
कवि भानु प्रताप कुशवाहा ने सत्य और शब्दों की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा, ‘शब्द हमारे शंख बने अब, सत्य हमारा स्वर हो जाए।’ डॉ. महेंद्र प्रताप पांडेय ‘नंद’ ने बचपन की यादों को कविता में पिरोया, वहीं डॉ. जगदीश पंत ‘कुमुद’ ने रावण के पुतले जलाने की परंपरा के माध्यम से समाज की विसंगतियों पर कटाक्ष किया।दीपक फुलेरा ‘बेबाक’ ने मर्यादा और सामाजिक परिस्थितियों पर अपनी रचना प्रस्तुत की। राम रतन यादव ने हिमालय की पीड़ा को स्वर देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। हेमा जोशी ‘परु’ ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। दया भट्ट, शांति देवी, दीपक यादव और माया नवीन जोशी ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।
इसके अलावा कैलाश पांडेय, श्यामवीर सिंह ‘चातक’, कुमारी मित्रा, कुमारी रोशिता, दिलीप पांडेय, मुर्तजा और ईफा सहित अन्य रचनाकारों ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम को यादगार बनाया। कविताओं में रामभक्ति, प्रेम, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम का कुशल संचालन राम रतन यादव ने किया। गोष्ठी ने साहित्य और संस्कृति के माध्यम से भारतीय परंपराओं तथा सामाजिक मूल्यों को जनमानस तक पहुंचाने का संदेश दिया।